सोमवार, 5 अगस्त 2024

चिड़िया

      चिड़िया 

ओ मालिक तू मान जरा, 

कहना मेरी स्वीकार कर । 

मत रूलाओ मेरे दिल को,

जरा पहले तु विचार कर ।


तू पावेगा क्या कुछ, 

मेरे हृदय को घाव कर ? 

तु मत दे मुझे दुःख ऐसा, 

जरा मुझपर तु उपकार कर ।


अरे सोच जरा तुम्ही कभी, 

अपनो से बीछर जाएगा। 

तब उनके बीना तेरे हृदय 

कितना सुकुन से रह पाएगा ?


यह सब कुछ तु जानकर भी 

बंदी बना मुझे बंद कोठरी में, 

रख प्यार कीतना भी देते हो। 

पर मैं बीछर कर अपनों से, 

मै तेरे प्यार को न भाती हु ।


मैं तो बस आजाद रह करके 

मिलकर साथीयों के संग में, 

पूरे दुनिया में घूम घूम कर 

खुशी से भ्रमन करना चाहती हूं ।

               

                                   अमित कुमार वंशी 

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