चिड़िया
ओ मालिक तू मान जरा,
कहना मेरी स्वीकार कर ।
मत रूलाओ मेरे दिल को,
जरा पहले तु विचार कर ।
तू पावेगा क्या कुछ,
मेरे हृदय को घाव कर ?
तु मत दे मुझे दुःख ऐसा,
जरा मुझपर तु उपकार कर ।
अरे सोच जरा तुम्ही कभी,
अपनो से बीछर जाएगा।
तब उनके बीना तेरे हृदय
कितना सुकुन से रह पाएगा ?
यह सब कुछ तु जानकर भी
बंदी बना मुझे बंद कोठरी में,
रख प्यार कीतना भी देते हो।
पर मैं बीछर कर अपनों से,
मै तेरे प्यार को न भाती हु ।
मैं तो बस आजाद रह करके
मिलकर साथीयों के संग में,
पूरे दुनिया में घूम घूम कर
खुशी से भ्रमन करना चाहती हूं ।
अमित कुमार वंशी
🐦🕊️🐔🐓
जवाब देंहटाएंNice 👍
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