सोमवार, 5 अगस्त 2024

बच्चे की चाह

 बच्चे की चाह 

नन्हे नन्हे बच्चे हैं हम सब 

हर पल आगे बढ़ते जाएंगे ।। 

जो चाहेंगे कर दिखलाएंगे। 

दिखने में कोमल है लेकिन, 

नही है हम दिल के कमजोर ।।


मुरेंगे न हम पीछे की ओर 

चाहे कितनी बाधा आ जाए 

पत्थर की बारीस हो जाए 

दुसमन चाहे बम बरसाए 

तब भी आगे ही बढ़ते जाएंगे, 

जब तक मंजिल नही पाएंगे ।।


बना देंगे हम एक ऐसी राह, 

किया न कोई सपनों में भी चाह ।। 

पत्थर को भी तोर फोर कर, 

एक बड़ी सुरंग बनाएंगे ।।


जाकर हम अंतरिक्ष में भी 

नया खोज कर दिखलाएंगे। 

ऐसा कर मां भारत का नाम, 

रौशन कर दिखलाएंगे । । 

नन्हें-नन्हें बच्चे हैं हम सब, 

हर पल आगे ही बढ़ते जाएंगे ।।


                                 अमित कुमार वंशी 

2 टिप्‍पणियां:

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