सोमवार, 5 अगस्त 2024

पापा

                 पापा 

सूरज की रोशनी जैसे करक होते है पापा ,

पर वो देख मुझे चिन्तित नरम होते है पापा ।। 

सहला कर पीठ पर हाथ पकड़ा अंगूली की गांठ,

दुबारा उठ खड़ा हो कर लड़ने की साहस देते पापा ।।


जब गिरा अपने पथ पर कभी डांटा कभी दिया चाटा,

प्यार था उसमे उनका की करे अच्छा आगे चलकर ।। 

कभी भी मेरे पापा छोरा नही मुझे गिरा वैसे पल ,

किया खड़ा कठिनायों से भी लड़ने को डट कर ।

मेरे प्यारे पापा , मेरे न्यारे पापा ।।


पर्वत जैसे खड़ा होकर, लड़ते बाधाएं से डटकर ,

पर वो रखते परिवार को हमेशा सुरक्षित कर ।। 

दर्द होता कभी, बैठ जाते बंद कोठरी चुप्पी साध कर,

रोते वोभी कठिनायों से, पर देख नहीं पाता कोई वो पल ।।

बड़े जिद्दी है वो, बीमार होकर भी चले जाते काम पर ,

मेरे प्यारे पापा, मेरे न्यारे पापा ।।


देख मां की खराब तबियत, मां बनकर करते फर्ज पूरी,

हर दुख मे हर दर्द मे हमेशा अपनी चाहत को मारकर,

परिवार की चाहत को साकार करते अपनी फर्ज पूरी।।

मेरे प्यारे पापा, मेरे न्यारे पापा ।।

                                        अमित कुमार वंशी 

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