नशा जीवन में
हमने सीखा है नशा में जीना यारो ,
हर नशा की अपनी भाव अलग है।।
छोटे उम्र की नशा की दाव अलग है।
जिद्द कर पा लेना हर ख्वाहिश ,
न मिले तो रोकर करना फरमाइश ।।
नशा दोस्ती की भी हमने देखी है,
साथ खेलना और झगड़ना, दंड झेलना।।
एक दोस्ती हमने चाहत में भी बदला है,
उसे पा लेने की नशा भी हमने झेला है।
दुनियां को उसके बराबरी हमने तौला है।।
लड़ना - झगड़ना और फिर मिलकर रहना,
मीठी मीठी बातें करना भी उससे सीखा है।।
नशा थी ये बड़ी बदनाम भरी जीवन की,
मैने इसको भी बहुत करीब से झेला है।।
नशे शोहरत की भी हमने देखी है,
कर मेहनत कड़ी शरीर को भी तोड़ा है।।
असंभव को संभव कर हमने जवानी में,
दो पैसे ज्यादा कमाकर हमने रक्खा है।।
अब नशा है हमे ज्यादा दिन जीने की,
छोर कर समोसे और चाट, जलेवी
अब हम काजू और किशमिश खाता हु।।
कुछ और दीन जी पाऊं, रोज यही जताता हु,
हर मंदिर में जाकर मन्नत यही गोहराता हु ।।
अमित कुमार वंशी
बहुत सुंदर रचना है पुरा जीवन का🤩👍
जवाब देंहटाएंBahut aacha 😊👍
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