पेड़ की वाणी
हम मानव के भलाई में,
उसके जीवन के उपजाऊ में-
आती मै काम हमेशा ।
बचपन से बुजुर्ग के बाद भी,
होती मानव को मेरी आवश्यकता ।
मै न होती तो मानव न होता,
क्योंकि हमसे ही प्राप्त करता वो-
जीवन का कितनी अनमोल उपहार,
ऐ जग का सारा इंसान ।
गर्मी की उस करी धुप में जब ,
तप कर मानव थक जाता है ।
तब देख वह मुझे उस एकांत में-
खुश हो आकर मेरे ही छांव में ,
बैठकर मानव हमेशा सुस्ताता है।
मै भी निःस्वर्थ भाव से मानव को-
अपने आंचल को हीला सुस्त कराती हु,
फिर भी प्यार न पाती हू, मै काटी जाती हू।
कैसे होते है ये मानव ब्रज हृदय वल शाली ,
मैं यह कभी भी नही समझ पाती हूं ।
अमित कुमार वंशी
🌴🌲🌳 पेड़ो की रक्षा करना चाहिए
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