मंगलवार, 6 अगस्त 2024

कोरोना

           कोरोना 

कोरोना की यह महामारी 

है सबको यह सता रही ।। 

न जात देख कर, न धर्म देख कर, 

फैल रही लापरवाही देख कर।। 

फिर क्यो घर की चौखट लांघ - 

लोग चौक-चौराहे पर मुस्तैद है ? 

कोरोना कोरोना करती दुनिया, 

फिर भी कुछ लोग बेखौफ है ।।


जानकर भी अंजान बने है, 

मन बहलाने बाहर चले है ।। 

खुद संक्रमण का खौफ त्याग- 

जान जोखिम में डाल रहे है,

अपने निर्दोष परिवार को भी- 

ऐसी बड़ी महामारी में फसा रहे ।। 

ईस संकट कि घड़ी मे भी न वो 

कोई सर्तकता को अपना रहे ।। 

कोरोना - कोरोना करती दुनिया, 

फीर भी कुछ लोग बेखौफ है ।।


जानकर सारा जग का हाल - 

वो नही कर रहे देश हित का व्यवहार ।। 

जब जनता न माने जनहित का विचार, 

तब क्या ही करेगी कोई  भी सरकार ? 

कोरोना कोरोना करती दुनिया, 

फीर भी कुछ लोग बेखौफ है ।।


है समय अभी भी देश बचालो, 

खुद मे ही कुछ बाते ठान लो ।। 

वे वजह भीड़ चौक-चौराहे से हटा लो, 

अपना कर्तव्य स्वयं नीभा लो ।। 

एक बार फिर से लौट आएगा - 

खुशियां भरा ए जग संसार, 

वो बाजार और चौराहे कि शोर, 

फिर लौट जाना मनचाहा आजादी कि ओर।।

                                     अमित कुमार वंशी 

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