कोरोना
कोरोना की यह महामारी
है सबको यह सता रही ।।
न जात देख कर, न धर्म देख कर,
फैल रही लापरवाही देख कर।।
फिर क्यो घर की चौखट लांघ -
लोग चौक-चौराहे पर मुस्तैद है ?
कोरोना कोरोना करती दुनिया,
फिर भी कुछ लोग बेखौफ है ।।
जानकर भी अंजान बने है,
मन बहलाने बाहर चले है ।।
खुद संक्रमण का खौफ त्याग-
जान जोखिम में डाल रहे है,
अपने निर्दोष परिवार को भी-
ऐसी बड़ी महामारी में फसा रहे ।।
ईस संकट कि घड़ी मे भी न वो
कोई सर्तकता को अपना रहे ।।
कोरोना - कोरोना करती दुनिया,
फीर भी कुछ लोग बेखौफ है ।।
जानकर सारा जग का हाल -
वो नही कर रहे देश हित का व्यवहार ।।
जब जनता न माने जनहित का विचार,
तब क्या ही करेगी कोई भी सरकार ?
कोरोना कोरोना करती दुनिया,
फीर भी कुछ लोग बेखौफ है ।।
है समय अभी भी देश बचालो,
खुद मे ही कुछ बाते ठान लो ।।
वे वजह भीड़ चौक-चौराहे से हटा लो,
अपना कर्तव्य स्वयं नीभा लो ।।
एक बार फिर से लौट आएगा -
खुशियां भरा ए जग संसार,
वो बाजार और चौराहे कि शोर,
फिर लौट जाना मनचाहा आजादी कि ओर।।
अमित कुमार वंशी
बहुत सुंदर 😊👍
जवाब देंहटाएंBahut aacha 😊
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