मंगलवार, 6 अगस्त 2024

पूछती है दुनिया

         पूछती है दुनियां 

आंखें लाल देख पुछती है दुनिया,

क्या बे तुम पी रक्खा है ।।

जबाब दू तो क्या दू जनाब उनसे ,

काफी है कि मैं इस जहा में जी रक्खा है।।


मुर्दा शरीर नही पर मन अब जिंदा कहां है, 

आंसू भरी इन आंखों मे सपना कहा है ।।

आज भी टटोलती है आस पास उसे ,

पर वो कमबख्त यहां मौजुद कहा है ।। 


क्या नही थी मेरी,वो सब कुछ थी,

मेरे अंधेरी आत्मा की प्रकाश थी। 

वो मेरी चाहत थी , मेरी राहत थी ,

उसी से जीवन में मुस्कुराहट भी थी ।। 


मन कहता है आएगी एक दिन वापस, 

मेरे साथ निभाने,संग नई दुनियां बशाने ।।

इतनी वो कठोर नही है,ओ दुनियां वाले ,

देखना लाएगी एक दीन मेरे लिए चांद तारे।।


कभी यादों में,कभी बांहों मे उसे महसूस कर,

कभी मेरी आंखें बरस जाती है तो 

आंखें लाल देख पूछती है दुनिया ,

क्या बे तुम पी रक्खा है ।।

जबाब दू तो क्या दू जनाब उनसे ,

काफी है कि मैं इस जहा में जी रक्खा है।।

                            

                                       अमित कुमार वंशी 


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