शनिवार, 26 जुलाई 2025

बेरोजगार की हुंकार

मत करो तुम अत्याचार,

हम हैं अभी बेरोज़गार।

खुद को कर रहे हैं तैयार,

लेकिन अभी हैं हम बेरोज़गार,

सहकर ताने हो रहे होशियार।


तपकर हम इस बवंडर में अभी,

बढ़ा रहे अपनी शक्ति और संस्कार।

बढ़ रहे कल्याण की दिशा में निरंतर,

कर रहा स्थिरता का जीवन में प्रहार।


दिन-रात मेहनत की भट्टी में जलते हैं,

पर चंद नंबरों से हम पीछे रहते हैं।

यह अंकों का फ़ासला कोई नहीं समझेगा,

ज़माना तो बस सफ़लता का दिन गिनेगा।


जो कल तक हमसे ही लेते थे हर पल सलाह,

कामयाब होकर आज वो ही दिखा रहे हमें राह।

वक़्त बदलते ही उनका भी बदलने लगा है अंदाज़,

पर ख़ामोश रहकर हम भी रच रहे हैं नया इतिहास।


सुनो वक़्त के थपेड़ों तुम भी,

यह ख़ामोशी नहीं है हमारी हार।

कठिन तपस्या का दौर है ये,

बस कुछ ही दिनों का है इंतज़ार।


नसीब बदलेगा, ये मंज़र बदलेगा,

मेहनत से चमकेगा अपना संसार।

आज भले ही हैं हम ख़ामोश,

कल गूंजेगी हमारी भी जय-जयकार!


                            अमित कुमार वंशी                         


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