कुछ AE ऐसे हैं,
जो बिना कहे भी अपना कर्तव्य निभाते हैं,
अपने सपनों को मेहनत से जोड़ते हैं,
और हर दिन थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ते हैं।
आपको देखकर सच कहूँ,
दिल को खुशी होती है…
लगता है,
मेहनत अगर सच्ची हो,
तो रास्ते खुद बनते हैं।
लेकिन कुछ ऐसे भी हैं,
जिनके दिल में बहुत कुछ करने का जुनून है,
आँखों में सपने हैं,
हाथों में हुनर है,
बस कभी पैसे की कमी रोक देती है,
कभी परिवार का साथ नहीं मिलता,
कभी शरीर साथ नहीं देता।
मैं उनकी मजबूरी समझता हूँ…
सच में समझता हूँ।
लेकिन एक बात कहूँ?
मुश्किलें किसी एक के हिस्से में नहीं आतीं,
हर किसी की जिंदगी में कोई न कोई कमी होती है।
फर्क बस इतना है—
कोई कमी को देखकर रुक जाता है,
और कोई उसी कमी को सीढ़ी बनाकर आगे बढ़ जाता है।
इसलिए तुमसे बस इतनी शिकायत है—
कोशिश करना मत छोड़िए।
बहुत बड़ा कदम नहीं,
बस छोटा-सा कदम उठाइये।
आज एक काम,
कल दूसरा काम…
शुरुआत छोटी होगी,
लेकिन एक दिन वही छोटी शुरुआत
आपकी बड़ी पहचान बनेगी।
और हाँ…
जब मैं आपको डाँटता हूँ,
तो उसे अपना विरोध मत समझना।
आपकी कमियाँ गिनाता हूँ,
क्योंकि आपके अंदर काबिलियत देखता हूँ।
आपसे उम्मीद करता हूँ,
इसलिए आपको आराम से हारते हुए नहीं देख सकता।
और कुछ बातें
शायद थोड़ी कड़वी हैं…
जब आप मुझसे झूठ बोलते हो,
तो शायद आपको लगता है
कि आप मुझे धोखा दे रहे हो।
लेकिन सच तो यह है—
आप मुझे नहीं,
अपने आप को धोखा दे रहे हो।
मुझे बहुत कुछ समझ आता है,
आपके शब्दों के पीछे छुपी बात भी,
आपकी चुप्पी भी,
आपकी मजबूरी भी।
फिर भी मैं आपको समझाता हूँ,
क्योंकि मेरा मकसद
आपकी गलती पकड़ना नहीं,
आपको आपकी मंज़िल तक पहुँचाना है।
आज शायद आपको लगे
कि मैं बहुत बोलता हूँ,
बहुत समझाता हूँ,
बार-बार काम के लिए कहता हूँ…
लेकिन एक दिन,
जब मैं आपके साथ नहीं रहूँगा,
और आप पीछे मुड़कर देखोगे,
तब शायद आपको मेरी ये बातें याद आएँगी।
तब शायद समझोगे—
वो डाँट नहीं थी,
वो चिंता थी।
वो दबाव नहीं था,
वो तुम्हारे भविष्य की फिक्र थी।
बस डर यही है…
कि कहीं आपको ये बात
समझने में बहुत देर न हो जाए।
क्योंकि समय लौटकर नहीं आता,
मौका हर बार दरवाज़ा नहीं खटखटाता,
और पछतावा
कभी बीते हुए कल को वापस नहीं लाता।
इसलिए आज ही उठो,
थोड़ा सा शुरू करो,
जो नहीं आता—सीखो,
जो नहीं है—बनाओ,
जहाँ कमी है—वहाँ रास्ता खोजो।
मैं आपसे पूर्ण होने की उम्मीद नहीं करता,
बस कोशिश करने की उम्मीद करता हूँ।
क्योंकि AE होना
सिर्फ एक पद नहीं है,
यह अपने गाँव,
अपने परिवार
और अपने भविष्य के लिए
कुछ करने का अवसर है।
और आखिर में बस इतना—
मैं आपका अधिकारी नहीं,
आपकी मेहनत का साथी बनकर
आपको आगे बढ़ते देखना चाहता हूँ।
आप सफल होगे,
तो खुशी आपकी ही नहीं होगी…
मुझे भी गर्व होगा कि
मैंने आपको उस सफर में
थोड़ा-सा साथ दिया था।
इसलिए नाराज़ मत होना मेरी डाँट से…
मैं आपसे नाराज़ नहीं हूँ,
बस आपको हारते हुए नहीं देख सकता।
अमित कुमार वंशी